संवाद २१ विं सदी की जीवन शैली और महानगरीय जीवन की आपाधापी के बीच अगर हम किसी महत्वपूर्ण चीज़ को खोते जा रहे हैं तो वह है ‘संवाद' . हमने, अपने आप को, रोज़मर्रा की भागमभाग और व्यस्तता के बंधनों में इस तरह बांध लिया है की संवाद के लिये और संवाद के महत्व को समझने का समय ही नहीं निकाल पा रहे। मित्रों से किया जाने वाला बे-झिझक संवाद, जीवन संगिनी से किया जाने वाला प्रेम-पूर्ण अथवा नोक-झोंक से परिपूर्ण संवाद, माता~पिता से समस्याओं को साझा करने और सुलझाने के लिये किया जाने वाला संवाद। ये सभी संवाद अगर जीवन में ना हो तो इस व्यस्त जीवन शैली के सभी द्वन्द हमें अकेले ही लड़ने होंगे। और मेरे विचार में, हममें से किसी में भी इतना सामर्थ्य नही है की अकेले इन द्वंद्वों का सामना कर सके, उन पर विजय पाना तो दूर की बात है। अपनों के साथ बैठना, उनसे मन की बातें कहना, कुछ उनकी सुनना और कुछ अपनी सुनाना। सलाह लेना, अपने विचार व्यक्त करना और विभिन्न मशवरों को साथ लेकर दुविधाओं से निपटने के लिए कारगर उपाय सोचना, इन सभी बातों का जीवन में आभाव सा आ गया है। या यू...