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Showing posts from January, 2020

इच्छाशक्ती ३

थका हू़ँ,  रुका हूँ , कई बार गिरा हूँ। सच कहूँ तो जीव़न में, बार-बार डरा हूँ। जतन से अौर अात्म संबल से,  परिश्रम से और इच्छाशक्ती से,  अपनों से की अभिव्यक्ती से,  मै पुन: आगे बढ़‍ा हूँ। भाग्यरेखा से सामंजस्य, परिस्थितीयों से संघर्ष. थमा अवश्य हूँ कुछ क्षणों के लिये, पराजित निश्चित ही नहीं हुआ हूँ। अमोल