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Showing posts from April, 2020

Beemanagar Tales-3

आज सुबह, चाय पीते हुए, जब कोयल की मधुर आवाज सुनी, तो बचपन की कुछ यादें ताज़ा हो गईं।  ऐसा नहीं है की मुंबई में कोयल की आवाज सुनने को नहीं मिलती और इस कठिन परिस्थिति में जब सब और शांति फैली हुई हे तभी कोयल की आवाज सुनने में आ रही है। पर यह भी सच है, की पश्चिमी द्रुतगति मार्ग के पास सोलहवीं मंज़िल पर रहते हुए,  वाहनों की तेज आवाजों के बीच, पक्षियों की मधुर ध्वनि पर कम ही ध्यान जाता है। खैर, बात १९८०-९० के दशक में उन दिनो की है जब परीक्षाएं समाप्त हो चुकी थीं, और बीमानगर में हम सब की गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी थी।   सुबह-सुबह पक्षियों के चहकने के बिच, मेरी आवाज गुंजी।। क्षितिज, क्षितिज, क्षितिज। सामने के घर से, पहली मंज़िल पर, आखरी खिड़की से आंखें मलता क्षितिज आया। "अबे साले इतनी जल्दी जाएंगे क्रिकेट खेलने ? अभी तो साढ़े छै ही बजा है।" जवाब आया "अभी उठाया है तब तू  सात तक मैदान पर आएगा". हमारे दल में तब मैं, क्षितिज, सुदीप, आनंद, अमित, बब्बू, दुष्यंत, हर्षल, गुलजीत और हाँ मधुरा भी हुआ करती थी। मधुरा, दुष्यंत-हर्षल ...